नन्ही-नन्ही क़दमों से, विद्या भूमि पावन हो गयी।। नन्ही-नन्ही क़दमों से, विद्या भूमि पावन हो गयी।।
भारत मां की आत्मा, बसी है देखो गांवों में। भारत मां की आत्मा, बसी है देखो गांवों में।
ये वे ही शापित अहिल्यायें हैं जो सावन की फुहारों में भीग/पत्थर से नारियों में बदल जाती हैं। ये वे ही शापित अहिल्यायें हैं जो सावन की फुहारों में भीग/पत्थर से नारियों में बद...
सखी... सखी...
उसके गालों को लट काली जब होले से सहलाती है। और उनको अपनी उंगलियों से सहज ही वो हटाती है। उसके गालों को लट काली जब होले से सहलाती है। और उनको अपनी उंगलियों से सहज ही...
प्राकृतिक सौंदर्य खत्म हो रहा है क्यूँकि ध्वनि प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। प्राकृतिक सौंदर्य खत्म हो रहा है क्यूँकि ध्वनि प्रदूषण बढ़ता जा रहा है।